वाणियों और प्रवचनों को सुनने से कम होती है सांसरिक मोहमाया-मास्टरजी
हरिद्वार, 15 जुलाई। प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु मास्टरजी ने प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता के दौरान कहा कि आत्मज्ञान पाने के लिए वाणिनियो एवं प्रवचनों को रोज सुनने से सांसारिक मोह माया कम होती है। सच्चे आनंद की प्राप्ति होती है और मनुष्य चित आनंद की अवस्था तक पहुंच जाता है। उन्होंने कहा कि सामाजिक चुनौतियां के चलते युवाओं में तेजी से बढ़ते मानसिक तनाव, एंजायटी, डिप्रेशन, नींद की समस्या, आत्महत्या के विचार और नशीले पदार्थ के सेवन जैसी समस्याएं देश में बढ़ रही है। उन्होंने समाधान के महत्व पर प्रकाश डाला और कहा कि आध्यात्मिकता ही एकमात्र समाधान है, जो मानवता को बचा सकता है। हम स्वयं जीवन के गहरे ज्ञान को समझते हैं। तभी हम अपने असली स्वरूप से जुड़ पाते हैं। मानसिक शांति आंतरिक बदलाव को भी महसूस किया जा सकता है। गुरूजी द्वारा देश भर में शिक्षाएं प्रचारित प्रसारित की जा रही हैं। अनुभव में ज्ञान होने के कारण हर तरह के सामाजिक परिवेश में जीवन के हर क्षेत्र में लोगों से सीधे जुड़ाव करता है। पिछले 18 सालों से गुरुजी अपने प्रवचनों से लोगों का जीवन आसान कर रहे हैं। पढ़े-लिखे नौजवान नौकरी करने वालों को भी उनके द्वारा जागरूक किया जाता है। सभी को जीवन की खुशियां बांटने का काम उनके द्वारा किया जा रहा है।
