–धर्मेन्द्र चौधरी विचारक, चिंतक
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री आदरणीय मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी (सेवानिवृत्त) जी के निधन का समाचार केवल एक व्यक्तित्व के चले जाने का समाचार नहीं है, बल्कि मेरे जीवन से एक ऐसे आत्मीय अभिभावक, मार्गदर्शक और स्नेहिल संरक्षक के दूर हो जाने का असहनीय दुःख है, जिसकी रिक्तता कभी भरी नहीं जा सकेगी।
खंडूरी जी का सम्पूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा, अनुशासन, सादगी और जनसेवा का प्रेरणादायी उदाहरण था। भारतीय सेना में मेजर जनरल के रूप में मातृभूमि की सेवा करने के बाद उन्होंने राजनीति में भी राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ जनहित को अपना सर्वोच्च ध्येय बनाया।
मुझे आज भी स्मरण है वर्ष 1991 में हमने एक साथ अपनी राजनीतिक यात्रा प्रारम्भ की थी। वे सांसद बने और मैं विधायक। समय के साथ राजनीति के अनेक पड़ाव आए, अनेक परिस्थितियाँ बदलीं, परंतु उनका स्नेह, उनका विश्वास और उनका आत्मीय मार्गदर्शन कभी नहीं बदला। वे मुझे सदैव छोटे भाई एवं पुत्रवत स्नेह देते थे। जब-जब जीवन और सार्वजनिक दायित्वों के कठिन मोड़ आए, तब-तब उनका मार्गदर्शन एक प्रकाशपुंज की भाँति मेरे साथ खड़ा रहा।
जब वे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने, तब उनके साथ कार्य करने और निकट से उन्हें देखने-समझने का अवसर मिला। प्रशासन के प्रति उनकी स्पष्टता, निर्णयों में पारदर्शिता, कार्य के प्रति कठोर अनुशासन और राज्यहित के प्रति उनकी प्रतिबद्धता अद्वितीय थी। अटल जी की सरकार में केंद्रीय मंत्री के रूप में उन्होंने देश के आधारभूत ढाँचे, विशेषकर सड़क विकास के क्षेत्र में जो ऐतिहासिक कार्य किए, वे सदैव स्मरण किए जाएंगे।
आज उनके जाने से केवल उत्तराखंड ने ही अपना एक सशक्त नेतृत्व नहीं खोया है, बल्कि मैंने व्यक्तिगत रूप से अपने जीवन का एक आत्मीय संरक्षक खो दिया है। ऐसा व्यक्तित्व विरले ही जन्म लेते हैं, जो पद से नहीं, बल्कि अपने चरित्र, अपने आचरण और अपने मूल्यों से लोगों के हृदय पर अमिट छाप छोड़ते हैं।
भगवान बद्री-केदार से प्रार्थना है कि पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकसंतप्त परिजनों, समर्थकों और हम सभी को यह असीम दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
