ब्राह्मण समाज को एक मंच पर लाने की पहल, रूड़की में हुई संयुक्त बैठक
“ब्राह्मण समाज संयुक्त मंच” गठन पर मंथन, संगठनों ने एकजुटता का लिया संकल्प

रूडकी, हरिद्वार। उत्तराखण्ड सहित भारत के सभी प्रदेशों के ब्राह्मण संगठनों का एक संयुक्त मंच बनाने के क्रम में कार्यरत ब्राह्मण संगठनों के प्रतिनिधियों की बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में ब्राह्मण समाज के विभिन्न संगठनों को एकजुट करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल देखने को मिली। रामनगर स्थित स्थानीय होटल में ब्राह्मण समाज से जुड़े विभिन्न संगठनों अखिल भारतीय देवभूमि ब्राह्मण जन सेवा समिति, विप्र फाउंडेशन, जनपदीय ब्राह्मण सभा, अखिल भारतीय ब्राह्मण एकता परिषद्, भारतीय ब्रह्म सभा, उत्तराखण्ड ब्राह्ण समाज महासंघ, भारतीय ब्राह्मण समाज, के प्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक में उपस्थिति रही।
बैठक का मुख्य उद्देश्य ब्राह्मण समाज के सम्मान की रक्षा तथा देश-प्रदेश में समय-समय पर ब्राह्मण समाज के विरुद्ध हो रहे दुर्भावनापूर्ण एवं द्वेषपूर्ण कृत्यों का संगठित रूप से विरोध और समाधान करना रहा। बैठक में अरूण कुमार शर्मा ने बताया कि निरंजनी अखाड़ा, मां मनसा देवी ट्रस्ट तथा अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत श्री रविन्द्र पुरी जी महाराज के संरक्षण एवं मार्गदर्शन में उनके निर्देशानुसार “ब्राह्मण समाज संयुक्त मंच” के गठन पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया है ताकि समाज की विभिन्न इकाइयों को एक सूत्र में बांधकर सामूहिक शक्ति का निर्माण किया जा सके। उन्होंने कहा कि “ब्राह्मण समाज संयुक्त मंच” के माध्यम से समय-समय पर सामाजिक, शैक्षिक एवं सांस्कृतिक मुद्दों पर जनजागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। साथ ही, समाज के युवाओं को संगठित कर उन्हें सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
बैठक में उपस्थित डॉ. वी.डी. शर्मा ने ब्राह्मण समाज की एकता पर बल देते हुए कहा कि वर्तमान समय में समाज को संगठित रहने की अत्यंत आवश्यकता है, क्योंकि विखंडन की स्थिति समाज की शक्ति को कमजोर करती है। एडवोकेट गोपाल नारसन ने कहा कि यदि सभी संगठन राजनीति की जूतियां उतार कर एक मंच पर आकर कार्य करें, तो समाज के सम्मान, अधिकारों और हितों की रक्षा अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकती है।
बालकृष्ण शास्त्री ने देश में लागू किए जा रहे विभिन्न शैक्षिक एवं सामाजिक नीतियों पर भी चिंता व्यक्त करते हुए विशेष रूप से यूजीसी से जुड़े हालिया प्रावधानों और नीतियों का विरोध करते हुए कहा कि ये निर्णय शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता और समान अवसर की भावना के विपरीत हैं। सभी संगठनों को तुनकमिजाजी छोडकर एक मंच पर आना चाहिए। आचार्य रमेश सेमवाल ने कहा कि सरकार से मांग की समाज पर किसी भी निर्णय को लागू करने से पूर्व व्यापक स्तर पर संवाद और समीक्षा की जानी चाहिए। सभी को आपसी मतभे भुलाकर एक मंच पर आने की घोर आवश्यकता है।
बैठक के अंत में सभी उपस्थित संगठनों के प्रतिनिधियों ने इस पहल का स्वागत करते हुए एकजुट होकर कार्य करने का संकल्प लिया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह संयुक्त मंच ब्राह्मण समाज के लिए एक मजबूत आवाज बनेगा और भविष्य में समाज के हितों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस मौके पर डॉ. अजय वशिष्ठ, राजेश पंत, डॉ. वी.डी. शर्मा, सतीश शर्मा, अरुण शर्मा, प्रमोद शर्मा, आदेश कुमार शमार्, अरविंद भारद्वाज, राजेश कपिल, नीरज कुमार शर्मा, श्री गोपाल नारसन, आचार्य रमेश सेमवाल बालकृष्ण शास्त्री, डॉ. रामकुमार शाण्डिल्य, विनय शर्मा, उज्ज्वल पंडित, अश्वनी भारद्वाज, विभोर कुमार, आदित्य शर्मा, डॉ. गोपाल कुमार शर्मा, चेतन शर्मा, डॉ. शैलेश कृष्ण, पंडित शुभम भारद्वाज आदि मौजूद रहे।
