नई दिल्ली। 31 जनवरी 2026
भारत बंद: संविधान, शिक्षा और समानता पर सरकार के हमले के विरुद्ध जनाक्रोश
जन सामान्य मंच सरकार और यूजीसी के कथित अन्यायपूर्ण, एकपक्षीय एवं असंवैधानिक निर्णयों के विरुद्ध 1 फरवरी 2026 को घोषित भारत बंद का पूर्ण समर्थन करता है। यह बंद किसी वर्ग, जाति या संगठन का नहीं—यह संविधान की आत्मा, शिक्षा की स्वतंत्रता और समान अवसरों की रक्षा का आह्वान है।
जन सामान्य मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष जुगुल किशोर तिवारी ने कहा कि यूजीसी के हालिया निर्णयों ने विश्वविद्यालयों को अराजकता, भय और असमानता की ओर धकेल दिया है। परीक्षा-काल जैसे संवेदनशील समय में छात्रों को पढ़ाई से भटकाकर सामाजिक विद्वेष की आग में झोंकना अक्षम्य अपराध है। सरकार का मौन और यूजीसी की हठधर्मिता यह संकेत देती है कि नीति-निर्माण अब संवाद नहीं, आदेश और दमन से चलाया जा रहा है। क्या यही ‘नया भारत’ है—जहाँ प्रश्न पूछना अपराध और असहमति देशद्रोह बना दी जाए?
हम स्पष्ट कहते हैं: शिक्षा कोई प्रयोगशाला नहीं, जहाँ मनमाने प्रयोग किए जाएँ। विश्वविद्यालय विचार की स्वतंत्रता के केंद्र हैं, न कि सत्ता की प्रयोगशालाएँ। समानता का दावा करते हुए भेदभावपूर्ण नीतियाँ थोपना संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का खुला उल्लंघन है। सरकार यदि स्वयं को लोकतांत्रिक मानती है, तो उसे तत्काल इन निर्णयों को वापस लेना होगा और सर्वसमावेशी, पारदर्शी संवाद की मेज़ पर आना होगा।
जन सामान्य मंच देश के हर छात्र, शिक्षक, अभिभावक और नागरिक से अपील करता है कि 1 फरवरी 2026 को शांतिपूर्ण, अनुशासित और लोकतांत्रिक तरीके से भारत बंद में सहभागी बनें। यह संघर्ष किसी के विरुद्ध नहीं—यह न्याय, समानता और भविष्य के पक्ष में है।
सरकार सुन ले: जनता चुप नहीं बैठेगी। शिक्षा पर ताले नहीं, संवाद के द्वार चाहिए। संविधान के साथ खिलवाड़ बंद हो—यही भारत बंद का संदेश है।
