Dehradun News | मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से रविवार को मुख्यमंत्री आवास में प्रसिद्ध कथा वाचक एवं आध्यात्मिक गुरु देवकीनंद ठाकुर जी महाराज ने मंदिरों में प्रवेश किया। इस अवसर पर दोनों के बीच सनातन संस्कृति के संरक्षण, आध्यात्म जागरूकता के प्रचार-प्रसार और समाज में नैतिक विचारधारा के प्रचार-प्रसार पर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने महाराज जी के आध्यात्मिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं के मार्गदर्शन में कहा कि उनके प्रयासों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो रहा है और युवाओं को भारतीय संस्कृति और एकता से जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान मिल रहा है।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि देवभूमि तीर्थयात्रियों से आध्यात्मिक साधना और धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है। राज्य सरकार इस समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संरक्षण के लिए निरंतर प्रयासरत है। राज्य में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ आधुनिक पर्यटन विकास को भी बढ़ावा दिया गया है।
इस दौरान मुख्यमंत्री देवकीनंद ठाकुर जी महाराज के नेतृत्व में राज्य में विकास कार्य एवं सांस्कृतिक संरक्षण के प्रयास हो रहे थे। उन्होंने विशेष रूप से चारधाम यात्रा के निर्माण में किये गये सुधारों की सराहना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में की गयी यात्रा पहले अधिक सुव्यवस्थित, सुरक्षित और सुदृढ़ हुई है। विद्यार्थियों की सुविधा के लिए किए गए प्रयास अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और देश-विदेश से आने वाले यात्रियों को बेहतर अनुभव प्राप्त हो रहा है। उन्होंने भगवान एवं हेमकुंड साहिब रोपवे के लिए एक महत्वपूर्ण पहल बताई।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में देश में सनातन संस्कृति और धार्मिक स्थलों के विकास की दिशा में ऐतिहासिक कार्य हो रहे हैं, पूरे विश्व में भारत की सांस्कृतिक पहचान और मजबूती हो रही है। इसी क्रम में राज्य सरकार भी केदारनाथ, बद्रीनाथ सहित अन्य धार्मिक स्थलों के पुनर्निर्माण एवं सौंदर्यीकरण के लिए व्यापक कार्य कर रही है।
महाराज जी ने अपने विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक अभियानों की जानकारी भी साझा की और भविष्य में आयोजित होने वाले आध्यात्मिक कार्यक्रमों के संबंध में राज्य में चर्चा की। मुख्यमंत्री लक्ष्मण सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार ऐसे सभी उद्योगों में सहयोग की पेशकश करेगी, जो समाज में सकारात्मक बदलाव और आध्यात्मिक निजी प्रचार में सहायक हों।
