हरिद्वार । गुरुकुल कांगड़ी विद्यालय, हरिद्वार के ऐतिहासिक प्रांगण में सोमवार को गुरुकुल के वार्षिकत्सव पर वैदिक विद्वान डॉ योगेश शास्त्री के ब्रह्मत्व में गुरुकुलीय परम्परा के सतत् उन्नयन हेतु चतुर्वेद शतक यज्ञ का आयोजन किया गया। चतुर्वेद शतक यज्ञ में सभी अतिथियों एवं याजिक जनों ने आहुतियाँ प्रदान की। डॉ. योगेश शास्त्री ने गुरुकुल के संस्थापक कुलपिता स्वामी श्रद्धानन्द के त्याग को नमन करते हुए गुरुकुल के शतवर्षीय इतिवृत्त पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रधान सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा, दिल्ली स्वामी आर्यवेश जी ने कहाँ कि आज की इस वर्तमान परिस्थिति में हमें गुरुकुलों की स्थापना करना अत्यन्त आवश्यक है। आज की शिक्षा प्रणाली में गुरुकुलों का समावेश आज की वर्तमान पीढ़ी के मार्गदर्शन के लिए एक प्रेरणा का काम करेगा। उन्होंने कहा कि सरकार को इस ओर सोचने की आवश्यकता है कि देश को विश्वगुरु बनाने का सपना तभी पूर्ण हो सकता है जब आज की इस युवा पीढ़ी को वैदिक शिक्षा से जोड़ा जाये।
इस अवसर पर मदन कौशिक कैबिनेट मंत्री उत्तराखण्ड सरकार ने कहाँ कि मेरा जीवन भी गुरुकुल से प्रेरिरत है, मैं आज जो भी हूँ गुरुकुल की ही देन है। हम सभी को अपने जीवन में गुरुकुलीय परंपरा को अपनाना चाहिए।
इस अवसर पर गुरुकुल धीरणवास के संरक्षक व प्रधान स्वामी आदित्यवेश ने कहाँ कि हमें स्वामी दयानन्द से प्रेरणा लेनी चाहिए कि जिस प्रकार उन्होंने सदैव इस समाज में अन्धकार को दूर करने का संकल्प लिया और कभी भी किसी भी ऐष्णाओं से प्रभावित नहीं हुए अपितु उनको त्याग दिया ऐसे महापुरुष हमारे जीवन में सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगें उन्होंने इस अवसर पर कहा कि स्वामी श्रद्धानन्द एक ऐसे व्यक्तित्व है जिन्होंने स्वामी दयानन्द के स्वपनों को साकार करते हुए अपना सर्वस्व बलिदान करके गुरुकुलों की स्थापना की।
इस अवसर पर गुरुकुल धीरणवास के संस्थापक स्वामी विश्वानंद ने कहाँ कि नित्य प्रति स्वाध्याय करने वाला व्यक्ति ही आर्य है। मनुष्य को वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ प्रगति करने के लिए वेद की शरण लेनी आवश्यक है।
इस अवसर पर स्वामी यतीश्वरानन्द पूर्व कैबिनेट मंत्री उत्तराखण्ड सरकार ने कहाँ कि हमें गुरुकुलों के संरक्षण एवं इनके पोषण करने में यदि अपना सर्वस्व न्यौछावर करना पड़े तो हम कदापि पीछे नहीं हटेंगें मेरा सम्पूर्ण जीवन आर्य समाज एवं गुरुकुल सेवा में समर्पित रहेगा।
इस अवसर पर आदेश चौहान विधायक रानीपुर, हरिद्वार ने कहाँ कि हमें आज के समय में आर्य समाज एवं गुरुकुल परंपरा को जीना चाहिए, जिससे हम अपने जीवन को उज्जवल कर सके।
इस अवसर पर वरिष्ठ उपप्रधान आर्य प्रतिनिधि सभा उत्तराखण्ड डॉ महेन्द्र आहूजा, प्रधान आर्य समाज इन्द्रलोक सिडकुल हरिद्वार व अन्तरिम सदस्य उत्तराखण्ड आर्य प्रतिनिधि सभा देव पाल राठी, प्रधान जिला आर्य उपप्रतिनिधि सभा हरिद्वार श्याम सिंह, पूर्व मंत्री आर्य प्रतिनिधि सभा उत्तराखण्ड, गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रतिनिधि डॉ. प्रभात कुमार, पार्षद वार्ड-54 हरिद्वार नागेन्द्र राणा, में छात्रों को अपना आशीर्वाद प्रदान करते हुए कहा कि आपका यहां अध्ययन करना तभी सार्थक होगा जब आप अपने कर्तव्य पथ पर अग्रसर होगें, नये-नये कीर्तिमान स्थापित करेगें और जब समाज में आप अपनी वाणी से पहचाने जायेगे।
इस अवसर पर आर्य समाज के भजनोपदेशक घनश्याम प्रेमी एवं भूपेन्द्र आर्य खतौली मुजफ्फनगर, उत्तर प्रदेश ने अपने भजनों से पूरे प्रांगण को मन मोहक बना दिया।
इस अवसर पर गुरुकुल के मुख्याधिष्ठाता डॉ. दीनानाथ शर्मा ने कहाँ कि मेरा सम्पूर्ण जीवन गुरुकुल माता की सेवा में समर्पित रहा है और आगे भी मुझे पदाधिकारीगण जो दायित्व प्रदान करेगें उनकी अपेक्षाओं को पूर्ण करने का मैं पूर्ण मनोयोग से संस्थाहित में प्रयास करता रहूंगा। इस अवसर पर पधारे हुए समस्त पदाधिकारियों को स्मृतिचिन्ह देकर सम्मानित करते हुए समस्त आर्यजनों व उपस्थित महानुभावों का धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया।
इस अवसर गुरुकुल के प्रधानाचार्य डा० विजेन्द्र शास्त्री ने भी सभी पदाधिकारियों एवं आगन्तुक विद्जनों का स्वागत एवं अभिनन्दन किया।
इस अवसर पर गुरुकुल कांगड़ी वेलफेयर के अध्यक्ष अश्विनी कुमार, मंत्री रविकान्त मलिक एंव कोषध्यक्ष सज्जन सिंह ने उपस्थित समस्त पदाधिकारिगणों, आर्यजनों एवं आगन्तुक महानुभावों का स्वागत ज्ञापित किया।
इस अवसर पर गुरुकुल कांगड़ी विद्यालय के सभी शिक्षकगण, शिक्षकेत्तर कर्मचारीगण, आश्रमाध्यक्ष एवं सभी अधिष्ठातागण उपस्थित रहें।
कार्यक्रम का संचालन डॉ योगेश शास्त्री एवं अशोक कुमार आर्य ने किया।
