कुंभ-2027 की तैयारियों में आश्रमधारी संतों की उपेक्षा का आरोप, मेला प्रशासन से संवाद और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की मांग
हरिद्वार। अखिल भारतीय संत आश्रम परिषद ने कुंभ-2027 की तैयारियों में आश्रमधारी संतों की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए मेला प्रशासन से सभी संत परंपराओं को समान प्रतिनिधित्व देने और शीघ्र संवाद शुरू करने की मांग की है।
प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानन्द गिरी महाराज तथा राष्ट्रीय महामंत्री राम विशाल दास महाराज ने बताया कि 19 जून को कुंभ मेलाधिकारी को आश्रमों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन अब तक न तो कोई औपचारिक उत्तर मिला और न ही परिषद को किसी बैठक अथवा परामर्श के लिए आमंत्रित किया गया।
उन्होंने कहा कि कुंभ केवल प्रशासनिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन धर्म की जीवंत आध्यात्मिक परंपरा का महापर्व है। इसकी सफलता के लिए अखाड़ों के साथ-साथ आश्रमों, मठों और स्वतंत्र संत परंपराओं को भी समान सम्मान और सहभागिता मिलनी चाहिए। उनका कहना था कि हरिद्वार के हजारों आश्रम कुंभ के दौरान लाखों श्रद्धालुओं को आवास, भोजन, चिकित्सा, सत्संग और आध्यात्मिक मार्गदर्शन जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं प्रदान करते हैं। इसलिए मेला प्रशासन को उनकी आवश्यकताओं और सुविधाओं पर भी समान रूप से ध्यान देना चाहिए।
परिषद पदाधिकारियों ने मेला प्रशासन से आग्रह किया कि वह किसी विशेष समूह के प्रभाव में आने के बजाय सभी संत परंपराओं को साथ लेकर कुंभ की तैयारियां करे। उन्होंने कहा कि अखाड़ा परिषद से जुड़े आंतरिक विवादों से संत समाज की छवि प्रभावित हुई है। ऐसे समय में टकराव नहीं, बल्कि समन्वय और संवाद की आवश्यकता है।
पत्रकार वार्ता में परिषद पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि मेला प्रशासन कुछ सीमित लोगों के प्रभाव में कार्य कर रहा है। उनका कहना था कि दिव्य और भव्य कुंभ का आयोजन केवल कुछ लोगों के भरोसे संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए व्यापक संत समाज, विशेषकर आश्रमधारी संतों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि अखाड़ा परिषद से जुड़े विवादों का समाधान आपसी स्तर पर होना चाहिए तथा संत समाज को धर्म और समाज से जुड़े बड़े मुद्दों पर एकजुट होकर कार्य करना चाहिए।
राष्ट्रीय महामंत्री राम विशाल दास ने कहा कि मेला प्रशासन केवल अखाड़ा-केंद्रित न होकर आश्रम-केंद्रित व्यवस्थाओं पर भी समान ध्यान दे। उन्होंने चेतावनी दी कि आश्रमधारियों की उपेक्षा किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने उत्तराखंड सरकार और कुंभ मेला प्रशासन से 19 जून को दिए गए ज्ञापन पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई, औपचारिक संवाद तथा कुंभ-2027 की तैयारियों में आश्रमों को सक्रिय भागीदारी देने की मांग दोहराई।
इस अवसर पर चन्द्रभूषणानंद, स्वामी कमलेशानंद तथा सत्यव्रतानंद सहित परिषद के अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
