“इस दिन लाल रंग के कपड़े में 11 कौड़ियां बांधकर पूजाघर में रख दें, ऐसा करने से मां लक्ष्मी की कृपा सदैव घर पर बनी रहती है।”
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार प्रत्येक वर्ष वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाता है। श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं प्रधान ज्योतिषाचार्य, राज्य पुरस्कार से सम्मानित महंत रोहित शास्त्री ने बताया कि इस वर्ष 2026 में अक्षय तृतीया का पर्व 19 अप्रैल, रविवार को मनाया जाएगा।
अक्षय तृतीया तिथि 19 अप्रैल, रविवार को सुबह 10:50 बजे प्रारंभ होकर 20 अप्रैल, सोमवार को सुबह 7:28 बजे समाप्त होगी। चूंकि मध्याह्नव्यापिनी तृतीया तिथि 19 अप्रैल की दोपहर में ही मिलेगी। इसलिए अक्षय तृतीया 19 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन जरूरतमंदों को दान, देव-पितृ तर्पण, यज्ञ, होम, आदि कर्म करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है।
इस वर्ष अक्षय तृतीया के दिन कृत्तिका नक्षत्र, आयुष्मान योग तथा तैतिल और गर करण का संयोग रहेगा। चंद्रमा इस दिन अपनी उच्च राशि वृषभ में स्थित रहेंगे, जिससे इस पर्व का महत्व और भी बढ़ जाएगा।
महंत रोहित शास्त्री ने बताया कि ‘अक्षय’ का अर्थ है – “जो कभी समाप्त न हो”। यह दिन सौभाग्य, सफलता और समृद्धि का सूचक है, जिसे ‘सर्वसिद्धि मुहूर्त’ भी माना जाता है। इस दिन शुभ कार्यों के लिए पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती। सोना, चांदी, बर्तन, भूमि, नया मकान, वाहन आदि की खरीदारी इस दिन शुभ मानी जाती है।
क्या दान करें अक्षय तृतीया पर —
अच्छी नीयत से दी गई हर वस्तु पुण्य प्रदान करती है। इस दिन घी, शक्कर, अनाज, फल, इमली, कपड़े, सोना, चांदी, जौ, गेहूं, सत्तू, दही-चावल, मिट्टी का घड़ा, कूलर-पंखे आदि का दान विशेष पुण्यदायी माना गया है। यह पर्व ग्रीष्मकाल में आता है, इसलिए शीतलता प्रदान करने वाले उपकरणों का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
अक्षय तृतीया का धार्मिक महत्व
इस दिन से जुड़े 12 प्रमुख पौराणिक प्रसंग निम्नलिखित हैं:
1. भगवान परशुराम जी का जन्म
2. कुबेर को खजाना प्राप्त होना
3. द्रौपदी के चीरहरण से श्रीकृष्ण द्वारा रक्षा
4. सतयुग और त्रेतायुग की शुरुआत
5. कृष्ण और सुदामा का मिलन
6. ब्रह्मा जी के पुत्र अक्षय कुमार का अवतरण
7. बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलना
8. बांके बिहारी मंदिर में चरण दर्शन
9. महाभारत युद्ध की समाप्ति
10. श्रीगणेश, शिव-पार्वती, लक्ष्मी-नारायण, कुबेर, परशुराम जी की विशेष पूजा
11. कोई भी कार्य प्रारंभ करना शुभ
12. दान, पूजन एवं तप से अक्षय फल की प्राप्ति
पूजन मंत्र —
ॐ पहिनी पक्षनेत्री पक्षमना लक्ष्मी दाहिनी वाच्छा भूत-प्रेत सर्वशत्रु हारिणी दर्जन मोहिनी रिद्धि सिद्धि कुरु-कुरु-स्वाहा।
ॐ आध्या लक्ष्म्यै नमः।
ॐ विद्या लक्ष्म्यै नमः।
ॐ सौभाग्य लक्ष्म्यै नमः।
ॐ अमृत लक्ष्म्यै नमः।
राशि के अनुसार विशेष उपाय —
मेष : लाल वस्त्र धारण करें, कन्या को लाल कपड़े दान कर कन्या पूजन करें।
वृषभ : चावल दान करें, स्टील के कलश में जल/चावल भरकर ब्राह्मण को दें।
मिथुन : वस्त्र व मूंग दाल दान करें, धन लाभ होगा।
कर्क : सफेद वस्त्र, चावल, दूध-दही का दान करें; चांदी का कड़ा/मोती पहनें।
सिंह : तांबा, गुड़ का दान करें, सूर्य देव की पूजा करें।
कन्या : हरे वस्त्र पहनें, पन्ना रत्न दान करें।
तुला : सफेद वस्त्र धारण करें व ब्राह्मण को चावल सहित वस्त्र दान करें।
वृश्चिक : गुड़, अनार, मूंगा दान करें।
धनु : पीले कपड़े, केला दान करें; हल्दी को पूजा स्थल में रखें।
मकर : तिल, सरसों का तेल और काले वस्त्र दान करें।
कुंभ : तिल, नारियल, लोहा दान करें।
मीन : पीले वस्त्र व हल्दी दान करें; पीले फूल को पीले कपड़े में बांध पूर्व दिशा में रखें।
भगवान परशुराम जी की जयंती — 19 अप्रैल, रविवार को मनाई जाएगी।
महंत रोहित शास्त्री (ज्योतिषाचार्य, स्टेट अवॉर्डी)
अध्यक्ष, श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट, जम्मू-कश्मीर
पता: पोस्ट ऑफिस: अपर रायपुर,
जिला: जम्मू, तहसील: जम्मू नॉर्थ,
राज्य: जम्मू-कश्मीर, पिन: 181123
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